Vipassana: CM केजरीवाल का 10 दिनों तक कामकाज से दूर, 19 दिसंबर को विपश्यना साधना के लिए रवाना

By taaza-time.com

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Delhi cm arvind kejriwal

Vipassana: दिल्ली के मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal एक बार फिर से आत्मा के साथ साक्षात्कार करने के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने खुशी से घोषणा की है कि सीएम 19 दिसंबर से 30 दिसंबर तक विपश्यना मेडीटेशन का आनंद लेंगे। पिछले साल, उन्होंने जयपुर में आयोजित विपश्यना शिविर में भी भाग लिया था।

यह नहीं, वे समय-समय पर दिल्ली को छोड़कर अलग-अलग स्थानों में मेडिटेशन का आनंद लेने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। इसके अलावा, उन्होंने बेंगलुरू में भी विपश्यना शिविर में अपनी दुनियाई चारिक यात्रा को एक नए दृष्टिकोण से सजीव किया है।

Delhi Latest News Hindi – CM केजरीवाल का 10 दिनों तक कामकाज से दूर

दिल्ली के विकासप्रिय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर मन की शांति की ओर बढ़ते हैं। उनका कार्यालय घोषणा करता है कि सीएम 19 दिसंबर से 30 दिसंबर तक विपश्यना मेडीटेशन में रत होंगे। पिछले वर्ष, केजरीवाल जयपुर में आयोजित विपश्यना शिविर में भाग लेने के बाद संतुष्ट हुए थे। इस बार भी वे अपने आत्मा के साथ मिलकर समर्पित होंगे।

पिछले बार, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केजरीवाल की अनुपस्थिति में दिल्ली के कामों को संभाला था। कौन निभाएगा इस बार की जिम्मेदारी, यह हमें अभी तक नहीं पता है, लेकिन एक बात स्पष्ट है – यह एक नया अनुभव और एकाग्रता का समय होगा।

What Is Vipassana (क्या है विपश्यना?)

विपश्यना, यह एक महान भारतीय ध्यान पद्धति है जिसमें भाग लेने वाले व्यक्तियों को एक अद्वितीय अनुभव में ले जाने का मौका मिलता है। इस प्राचीन पद्धति में, लोग निश्चित समय तक संचार से पूरी तरह अलग रहते हैं, और इस दौरान वे किसी भी संवाद या संकेत के बिना, अपने आत्मा के साथ अद्वितीय जुड़ाव महसूस करते हैं।

विपश्यना केंद्र में साकारात्मकता और मानवता के साथ जुड़ने का एक अद्वितीय माहौल होता है, जिससे वहां रहने वाले व्यक्ति मानसिक साधना का अनुभव करते हैं और अपनी आत्मा को शुद्धि और समृद्धि की ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सफल होते हैं। इसलिए, विपश्यना को आत्म-समर्पण और आत्म-समृद्धि का सबसे उत्कृष्ट साधन पद्धति माना जाता है।

विपश्यना कैसे करे ?

विपश्याना मेधावी जीवन की दिशा में: एक विस्तृत लेख विपश्याना, जो सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में से एक है, एक ध्यान पद्धति है जो भगवान गौतम बुद्ध के द्वारा प्रशिक्षित की गई थी। यह ध्यान का एक विशेष प्रकार है जिसमें योगी सीधे अपने अंतरात्मा की खोज करता है और सच्चाई की प्राप्ति के माध्यम से आत्मा के साथ साक्षात्कार करता है। यह ध्यान का एक आद्यत्मिक अभ्यास है जिसका मुख्य उद्देश्य मन की शांति, सत्य ज्ञान, और सच्चे सुख की प्राप्ति है। इस लेख में, हम जानेंगे कि विपश्याना को कैसे किया जाता है और इसके लाभ क्या हैं।

विपश्याना का मूल सिद्धांत:

विपश्याना ध्यान का मूल सिद्धांत है ‘उत्तमा सतिपट्ठाना’ या ‘सतीपट्ठाना भावना’। इसका अर्थ है मन को पूर्णता के साथ प्रस्तुत करना और उसे विक्षेपों से मुक्त करना। इस ध्यान की विशेषता यह है कि यह व्यक्ति को उसके आत्मा के साथ सच्चे संबंध में ले जाता है, जिससे उसे अपनी सत्य नित्यता का अनुभव होता है।

विपश्याना की प्रक्रिया:

  1. आरंभिक धारणा: सबसे पहले, व्यक्ति को एक शांत और निर्मल स्थान पर बैठना चाहिए। वह अपने शरीर को सुखद बैठकर ध्यान लगाता है।
  2. श्वास सतीकरण: योगी अपने ध्यान को श्वास की ध्यानितता पर ले जाता है। उसे अपनी श्वास की गहराई, गति, और तरिका का ध्यान रखना चाहिए।
  3. वेदना की अनुभूति: यहां योगी को अपने शरीर में हो रही वेदनाओं का ध्यान करना चाहिए। वह इन वेदनाओं को स्वीकार करता है और उन्हें अनुभव करता है बिना किसी राग या द्वेष के।
  4. चित्त की शुद्धि: योगी को अपने मन की शुद्धि के लिए प्रयास करना चाहिए। उसे अपने विचारों को शांत करना चाहिए और मन को एकाग्रता में लाना चाहिए।
  5. ध्यान का अभ्यास: आखिरकार, योगी को अपने अंतरात्मा की ओर ध्यान लगाना चाहिए। उसे अपनी आत्मा को महसूस करना चाहिए और उससे मिलना चाहिए।

विपश्याना के लाभ

  1. मानसिक शांति: विपश्याना ध्यान से व्यक्ति मानसिक चिंता और असमंजस मुक्त होता है और उसे आत्मा का साक्षात्कार होता है।
  2. स्वास्थ्य के लाभ: इस ध्यान का अभ्यास करने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  3. सत्यज्ञान: विपश्याना के माध्यम से व्यक्ति अपने अंतरात्मा की सत्यता को अनुभव करता है और उसे जीवन की सच्चाई पर नजर आती है।
  4. सहज जीवन: इस ध्यान से व्यक्ति अपने जीवन को सहज बना सकता है और उसे अपने कर्तव्यों का सही तरीके से निर्वहन करने में सहायक होता है।

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